# नमन मंच 🙏🙏🙏
# साहित्य संगम संस्थान उड़ीसा इकाई
# दिनांक - 06/04/2021
# दिन - मंगलवार
# विषय - सागर किनारे
# विधा - पद्म
हे प्रभु मुझ डूबती नैया को,
तुम पार लगाओ,
इस भवसागर में, तूं ही सहारा,
कैसे पाऊँ मैं ,सागर किनारा,
मुझ निर्धन तुम ही खजाना,
तेरे बिन कोई दूजा न जाना,
सागर गहरा नाव मेरी छोटी,
अवगुण मेरे कोटि कोटि,
बीच मझधार न छोडो़ नाथ,
मोहे अनाथ न छोड़ो साथ,
सागर किनारा बहुत निकट दिख आया,
तुमरी कृपा मुक्त द्वारा पाया ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू, जम्मू कश्मीर
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