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शनिवार, 24 अप्रैल 2021

पिता

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#गीत गौरव

# दिनांक - 20/06/2021

# दिन - रविवार

# विषय - पिता

# विधा - गद्य - पद्य ( छंदमुक्त कविता) 

परमपिता परमेश्वर तेरे चरणों में प्रणाम, 

तेरे ही कारण आते ही सबके शरीर में प्राण, 

तूं ही  सृष्टि का सृजनहार, पालनहार, संहारक, 

तूं ही सबका सच्चा मालिक, 

कण कण में मालिक बास तेरा, 

पूरे ब्रह्माण्ड में केवल एक राज तेरा , 

भेदभाव किसी से नहीं करता, 

सबसे बराबर प्रेम रखता, 

जात पात तेरा धर्म वर्ण न कोई, 

निरंकार पिता तेरा आकार न होई, 

तेरा दर्शन इन नयनों से देखा न जाता, 

फिर भी तूं सब जगह समाता, 

तूं सबको देता आहार, 

तेरे हमेशा भरे रहते भंडार, 

तेरे घर कोई कमी नहीं, 

तेरे दर पर आनेवाले को रहती कोई गमी नहीं, 

 पिता परमेश्वर तेरी मेहर पर करूँ मैं मान, 

तेरे ही कारण आये मेरे पिंड में प्राण । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर









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