# नमन मंच 🙏🙏🙏
# साहित्य संगम संस्थान जम्मू कश्मीर इकाई
# दिनांक - 07/04/2021
# दिन - बुधवार
# विषय - मेरे शाम
# विधा - गीत
मेरे शाम जी, बांसुरी बजाना
मेरी सोयी हुई ,आत्मा को जगाना
तेरी गोपी हूँ, तेरे गुणों को ,हृदय में पिरोती हूं
एक दरस दिखाना ,नयनों की प्यास बुझाना
न मैं राधा हूँ ,न रूकमणि
प्यार करती हूँ ,तुझसे हर घड़ी
भवसागर में ,तेरा ही सहारा
तेरी कृपा से, उतरूं पारा
मेरे अवगुणों को ,चित न धरना
मेरा पार उतारा, तुम ही करना।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू, जम्मू कश्मीर
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