#काव्य_प्रभा_अखिल_भारतीय_ससाहित्यिक_मंच
#संस्मरणलेखनक्रमांक-०१
विषय- बात उन दिनों की है
दिनांक - २१/५/२१
विधा -संस्मरण
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बात उन दिनों की है जब हम गाँव में रहते थे। हमारे घर के पास पीपल का एक वृक्ष था। हमनें पूरा दिन पीपल के नीचे बैठे रहना। वही खेलना कूदना । कुलचे वाला पीपल के पेड़ के नीचे ही दुकान लगता था। हम उससे बहुत सारे कुलचे खरीदकर खाते थे ।
गाँव के बहुत सारे लोग घर और खेतों का काम खत्म करके अपनी थकान वही आकर उतारते थे। सभी को पीपल की ठंडी ठंडी छांव बहुत भाती थी । गाँव का अमीर से अमीर ,गरीब से गरीब आदमी वही आकर अपनी थकान मिटाने आता था पीपल के पेड़ ने सबको एक समान बना दिया था।
गाँव की बड़ी से बड़ी, छोटी से छोटी समास्याओं का समाधान यही किया जाता था, क्योंकि गाँव की पंचायत भी यहीं होती थी ।
गाँव के बुजुर्ग पुरुष यहाँ बैठकर ताश खेलते थे। गाँव की सभी औरतें किसी विशेष पर्व पर यहाँ आकर पीपल के पेड़ को धागा बांधती थी और उसकी पूजा करती थी । जिस दिन औरतों की पूजा का दिन होता था ,मै और मेरे अन्य साथी पीपल के पेड़ के पास जाकर सुबह ही बैठ जाते थे, क्योंकि उस विशेष पर्व पर औरतें बच्चों को मीठी रोटी का प्रसाद भी बांटती थी । हम मीठी रोटी का प्रसाद बड़े चांव से खाते थे।
जब भी मैं पीपल को देखता हूँ, मेरे बचपन की यादें ताजा हो जाती है।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू, जम्मू कश्मीर
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