# नमन मंच 🙏🙏🙏
# समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत
# दिनांक - 25/04/2021
# दिन - रविवार
# विषय - दहशत
# विधा - स्वैच्छिक
कोरोना ने दहशत का जाल बिछाया,
बेरोजगारी का आलम छाया,
मुंह पर लगा लिया मास्क ,
यही सोचकर बैठे है कहीं बन जाए पास्ट,
मृत्यु डाला ऐसा डेरा,
लगता है कोई नहीं मेरा,
शमशान तक भी नहीं मिलता किसी का साथ,
कैसा वक़्त आया मेरे नाथ,
गले मिलने का रिवाज मिटाया,
ना जाने इस कोरोना ने कैसा कहर बरपाया,
अपनों को खोने का सब ने गम मनाया,
कोई कुछ कर नहीं पाया,
वैक्सीन ने लोगों की उम्मीदों को बढाया,
कोरोना की दहशत को दिलों से हटाया ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू, जम्मू कश्मीर
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