# नमन मंच 🙏🙏🙏
#हिंददेश परिवार बिहार इकाई
# दिनांक - 25/04/2021
# दिन - रविवार
# विषय - मोबाइल
# विधा - गद्य - पद्य (आलेख)
आज मोबाइल हमारी दैनिक जरूरत बन गया है। हम एक क्षण भी मोबाइल से दूर नहीं रह सकते हैं। बूढ़े, जवान, बच्चे सब मोबाइल के दिवाने है इसमें सभी के मनोरंजन का सामान है ।
बच्चे मोबाइल से ज्ञानार्जन कर सकते हैं जो ज्ञान किताबों से नहीं मिल पाता वो हम इंटरनेट के माध्यम से मोबाइल पर हासिल कर सकते । यूटूब के माध्यम से बड़े बड़े विद्वानों के भाषण सुन सकते हैं और एक ही विषय पर हमें अनेक विद्वानों के भाषण सुनने को मिल जाएगें। खाना बनाने की विधि,विद्यालय के प्रोजेक्ट बनाना आदि भी सीख सकते हैं।
व्हाट्सएप मैसेंजर, फेसबुक ,इंस्टाग्राम के माध्यम से हम दूर बैठे मित्रों से आडियो वीडियो दोनों माध्यम से बात कर सकते हैं। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी भी कर सकते हैं, क्योंकि फेसबुक, इंस्टाग्राम में ऐसे बहुत सारे समूह बने होते है, जो हमारे ज्ञान में वृद्धि करते हैं और मुश्किल विषय पर हमारी सहायता भी करते हैं।
वृद्ध महिला ,पुरुष मोबाइल में भजन सतसंग सुनकर अपना समय गुजार सकते हैं और अपना मनोरंजन कर सकते हैं ।
मोबाइल विज्ञान की बहुत सुन्दर देन है, लेकिन इसका ज्यादा इस्तेमाल हमारी सेहत के लिए हानिकारक है । ज्यादा मोबाइल चलाने से हमारी आंखों पर असर पड़ता है। कई बार कई लोगों की आंखों की रोशनी कम हो जाती है । कई बच्चे दिनभर मोबाइल में वीडियो गेम खेलते रहते हैं, और अपनी पढ़ाई पर ध्यान नहीं देते है । इसका परिणाम यह होता है कि या तो वो परीक्षा में अंक कम लेते हैं या परीक्षा में असफल हो जाते हैं । मोबाइल की लत लग जाने के कारण कई बच्चे खेलकूद की तरफ ध्यान नहीं देता है । इसके कारण भी उनका शारीरिक विकास भी रूक जाता है।
मोबाइल के कारण कई लोगों के पास अपने परिवार और रिश्तेदार के लिए समय नहीं होता है । वो पूरा दिन मोबाइल चलाने में ही बिताते है इसके कारण उनके संबंधों में दरार आनी स्वभाविक है । क्योंकि उनके पास अपनों से बात करने का समय ही नहीं होता है । ऐसे लोगों को बाद में पछताना पड़ता है।
मोबाइल विज्ञान का बहुत अनुपम उपहार है। आज कोरोना काल के समय इसी के माध्यम से बच्चों को शिक्षा प्रदान की जा रही हैं । कई लोगों को इसके माध्यम से रोजगार भी मिला । हमें मोबाइल का इस्तेमाल करना है पर जरूरत के अनुसार करना है । इसका ज्यादा इस्तेमाल हमारी सेहत और परिवार के लिए सही नहीं है।क्योंकि हमें बच्चों को ज्ञानवान और संस्कारी दोनों बनाना है।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू,जम्मू कश्मीर
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