# नमन मंच 🙏🙏🙏
# कलमकार कुम्भ
# दिनांक - 01/04/2021
# दिन - बृहस्पतिवार
# विषय - समझौता
# विधा - छंदमुक्त कविता
जिंदगी जीनी पड़ती है
समझौतों के साथ
हर काम बनता है
समझौतो के साथ
नहीं तो दरारें बन जाती है
अपनों के साथ
जो समझौता करता नहीं
जीवन में कुछ नहीं कर पाता
अपने ही अहंकार में
जीवन व्यर्थ गंवाता
समझौता जीवन में,
हर किसी महत्व बताता
अकेले रहकर ,
कोई काम नहीं बन पाता
समझौता जीवन जीने की
नई सीख सिखाता
बिना समझौते के
जीवन का चक्र
चल नहीं पाता।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू कश्मीर, जम्मू
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