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गुरुवार, 8 अप्रैल 2021

बारहमासी चिंताएं

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्य संगम संस्थान गुजरात इकाई

# दिनांक - 08/04/2021

# दिन - बृहस्पतिवार

# विषय - बारहमासी चिंताएं

# विधा -  कविता

बारह मास सताया, 

कोरोना ने बहुत रुलाया । 


रोजगार को छीना , 

भूल गया खाना पीना। 


कोरोना का सिर्फ बहाना है, 

हर पल मुश्किलों में बिताना। 


गरीब का कोई नहीं सोचता, 

वो भी अपने हक के लिए नहीं बोलता। 


बारहमास गरीबी में रहता, 

भूख प्यास को चुपचाप सहता। 


बच्चों के भविष्य की चिंता दिन रात, 

बेबस गरीब कुछ कर नहीं पाता। 


बारहमास  यही चिंताएं, 

जो गरीब का सुख चैन चुराए। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर








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