# नमन मंच 🙏🙏🙏
# सारथी ग्रुप
# दिनांक - 29/04/2021
# दिन - बृहस्पतिवार
# विषय - विरह
# विधा - लघुकथा
सरोज ख्यालों में खोई रहती है । अपने पति से दूरी उसके बर्दाश्त के बाहर हो रही थी, पति को विदेश गए कई साल हो गया है शादी के तीन बाद ही चले गए थे । अब तो बच्चे भी बड़े हो गए थे ,दस साल से पति आने का इंतजार कर रही थी।
एक औरत का अकेले बच्चों को पालन कितना मुश्किल होता हैं, यह सरोज ही बता सकती है।पति से मिलन के लिए वह तड़प रही थी ,लेकिन वह अपनी भावनाओं को छिपाकर अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं ।
जब पति विदेश का रवाना हुए थे। उस समय बड़ा दो साल और छ: मास की ही थी। बच्चों ने पिता को कभी देखा ही नही था, तस्वीर को देखकर ही मन को बहला लेते थे । बच्चों को द्वारा यह पूछना पापा कब वापिस आयेगें सरोज के बिरह की वेदना को ओर बढ़ा देता था।
अब सरोज की आंखे भी पति का इंतजार करते थक गई थी। अब वह अपने पति के साथ ही शेष जीवन व्यतीत करना चाहती थी।उसे इस बात कोई ज्ञान नहीं था उसकी विरह अवस्था कब अंत होगा।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू कश्मीर, जम्मू
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