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सोमवार, 2 दिसंबर 2024

नई शुरूआत


 मन की दुविधा का हो गया नाश ,

अद्भुत है नाम का प्रकाश ,

नाम का रंग अति गूढ़ा लागा ,

यम का दूत डर कर भागा।

सब आसरे छोड़कर शरणाई आया,

दुर्भाग्य को सौभाग्य बनाया ,

भवसागर  निज हस्त दे पार करीजै,

शरणागत की अब लाज रखीजै।

दीन दुनिया की लाज गवाई, 

ह्रदय बस गए कृष्ण कन्हाई,

मन के खुल गए सब कपाट,

नित्य देखा रहा हूँ तुम्हारी बाट।


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह 

जिला - सांबा ,जम्मू-कश्मीर 



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