बढ़ता प्रदूषण कर रहा है जीवन को बेहाल ,
रोकने का अब करो ख्याल ,
प्रदूषण फैलाता रोगों का जाल ,
सबका हो गया बुरा हाल ।।
पेड़ पौधे काटकर मनुष्य बना बैठा होशियार,
रोगों का सह रहा अब प्रहार,
सुखद जीवन हो गया दुश्वार ,
अब ढूंढ रहा उपचार ।।
प्रकृति से छेडछाड पड़ गई भारी ,
चारों ओर फैल गई प्रदूषण की भयंकर बीमारी,
प्रदूषण से तबाह हो रही दुनिया सारी ,
अब दिखा रहा है अपनी लाचारी।।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा,जम्मू-कश्मीर
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