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गुरुवार, 17 अक्टूबर 2024

सिलसिला


सिलसिला प्रेम का कभी न होगा कम

मुश्किले मुसीबते आती रहे हर दम 

इरादों को तोड़ न पायेगा कोई गम 

प्रेम लीनता पाते ही भूल जाओगे सब गम।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जिला सांबा,जम्मू-कश्मीर 


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