मोहि आस ,भरोसा तेरा
तूं परब्रह्म स्वामी मेरा
अगम अगोचर सब थाउ है तेरा बसेरा
अब तो डाल दो हृदय में फेरा
संसार का ही भाव है तेरा मेरा
मन का गुलाम बना गया माया का चेरा
बिना गुरु के सब ओर अँधेरा ही अँधेरा
गुरु ज्ञान से टूटे गया झूठी माया का डेरा
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा,जम्मू-कश्मीर
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