#शीर्षक धार मन मेरे
दया धार मन मेरे ,तभी ढीले होगे बंधन तेरे
दया क्षमा का पहन ले गहना ,सीख ले दुख सुख को सम कर सहना
दया धार मन मेरे ,तभी ढीले होगे बंधन तेरे ---------
इस जग में सदा बैठे नहीं रहना, मान ले सतगुर का तूं कहना
दया धार मन मेरे ,तभी ढीले होगे बंधन तेरे -----------
पाप जुल्म जीवों पर मत करना, कर्मों का लेखा तुझे ही देना पड़ना
दया धार मन मेरे ,तभी ढीले होगे बंधन तेरे -----------
बेईमानी ठगी चोरी से धन न कमाना, खाली हाथ जग से है जाना
दया धार मन मेरे ,तभी ढीले होगे बंधन तेरे -----------
यह देश है बेगाना, झूठे मान सम्मान में मत फंस जाना
दया धार मन मेरे ,तभी ढीले होगे बंधन तेरे -----------
सब पशु पक्षियों पर दया तूँ दिखाना , अपने स्वाद के लिए उनको कष्ट मत पहुंचाना
दया धार मन मेरे ,तभी ढीले होगे बंधन तेरे -----------
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा जम्मू-कश्मीर
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