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शनिवार, 17 अगस्त 2024

बादल

 #बादल

बादल  हूं हौसला जगाने आया हूं

उदास हुए मनों में नवस्फूति संचार करने आया हूं

सुस्ती को सदा  के लिए भगाने आया हूं

जिनकी इच्छाएँ सूखे पत्ते सी  हो गई है ,

हरा भरा करने आया हूं

गर्जन करके दामिनी की, 

तंद्रालस तनों का मिटाने आया हूं 

बुझे हुए दीपकों में,

 रोशनी जगाने आया हूं 

गर्मी से तपते वनों को,

 ठडंक का अहसास कराने आया हूं

जिनकी आशाएं मर चुकी है, 

नव आशाएं जगाने आया हूं 

दुखों से भरी हुई जिंदगी को,

सुखमय बनाने का साधन बनकर आया हूं


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जिला सांबा, जम्मू-कश्मीर 

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