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मंगलवार, 16 जुलाई 2024

सावन आयो रे

 सावन आयो रे

रिमझिम  रिमझिम सावन आयो रे
पिया मिलन की आस बढायो रे
अब बुझेगी प्यास अंखियन की 
अब बारी पिया मिलन की आयो रे।
 
बिरह अग्न मोहि बहुत जलायो
सांप डसना सा दुख पायो रे
सूखे पेड़ पर जैसे हरियाली आवे
ऐसा सुख पिया मिलन से पायो रे ।

पिया मिलन से हर्षित अंग-अंग
सतगुर संग मैं ऐसा अवसर पायो रे
सतगुर हृदय में अब बास कियो रे
ज्ञान वर्षा अब बरसायो रे ।

पीव मिलन आस अब पूरी
सतगुर मेहर का मेघ बरसायो रे
असल सावन का सुख अब पायो
पिया मिलन का अवसर अब आयो रे।

स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा, जम्मू-कश्मीर 

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