=सत्संग का लाभ
संगत साधु की मन पाता भाग्य वाला ,
संत कृपा से ही खुलता दसवें दर का दरवाज़ा ,
अंतर की खोज संत सतगुर बताता ,
देही के अंदर ही सारा ब्रह्मांड समाता ,
साधु संगति से आवागमन मिट जाता ,
लोक परलोक सुखमय बनाता ,
सुख दुख उसे छू नहीं पाता ,
निर्भय होने का भाव साधु-संत ही सिखाता ,
सत्संग का लाभ जान ले मीता ,
भ्रमजाल में फंसा मन भी जाए जीता ।।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा , जम्मू-कश्मीर
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