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रविवार, 26 नवंबर 2023

हिंद की चादर

 =हिंद की चादर 

चाँदनी चौक जिसके खून में नहाया था ,

मुगलों का आसन जिसने हिलाया था ,

प्राणों की आहुति देकर सबका धर्म बचाया था ,

हिंद की चादर होने का सम्मान, तभी तो सतगुर ने पाया था।। 

वीर नहीं वो महावीर थे ,

दीन दुखियों के वो ही पीर थे ,

दीन की रक्षा के लिए सतगुर ने कदम बढ़ाए थे ,

तीन गुरसिक्खों भी सतगुर संग प्राण चढ़ाने आए थे ।।

सतगुर का किसी संग न बैर था,

कोई भी उनके के लिए गैर न था ,

कश्मीरी पंडितों ने धर्म रक्षा के लिए सतगुर को पुकारा था ,

 वचन देकर सतगुरु ने कश्मीरी पंडितों का धैर्य बाँधा था।।

जालिम हुकूमत के सरदार सतगुर के सत इरादों से घबराए थे,

सतगुर पर ढेरों जुल्म पापियों ने ढाए थे ,

धर्म  आजादी की आवाज सतगुर उठाते थे ,

जालिमों के जुल्म के आगे शीश कभी न झुकाते थे।।

स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जिला - सांबा , जम्मू-कश्मीर 




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