मेरा गुरू ही मेरा परमेश्वर है
वो ही भक्ति-मार्ग पर चलाने वाला सर्वेश्वर है
वो ही समस्त ज्ञान का भंडार है
सभी जीवों का भवसागर से करता बेड़ा पार है
मानव जीवन में आना उसका परम उपकार है
पापों से भरे जीवों का करता उध्दार है
सत्संग में आना वाले का बढ़ता ईश्वर से प्यार
सतगुर की रहमते अपरंपार है
वो ही सबका सच्चा यार है
सब जीवों को एक ही क्षण में देता तार है।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
सांबा , जम्मू-कश्मीर
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