=सच्चा दीपोत्सव
सतगुर संग अपना देश मैं जानया
घट ही भीतर सब रंग मानया
अंतर जोत जगाई अज्ञान भगानया
सच्चा प्रकाश मिला अब मेरा मन मानया
पंच शब्द सुन विसमाद विसमाद पुकारनया
पाँच बैरी अब गया भगानया
सच्चा दीपोत्सव सतगुर ही समझानया
सतगुर संग ही प्रकाश महत्व जानया
सतगुर संग बड़भागी मानया
जन्म मरण का दुख तिस संग ही गंवानया
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा , जम्मू-कश्मीर
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