#मन मेरे तेरा निज घर है सतनाम
मन मेरे तेरा निज घर है सतनाम
सब झूठे है दुनियाभर के काम
साधुसंगति में मिलता है अमृत नाम
मन बैठा जाता है करके आराम
नष्ट कर देता है मन का झूठा मान अभिमान
परम निर्मल है प्रभु का नाम
ह्रदय ही बन जाता है प्रभु का धाम
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
सांबा, जम्मू-कश्मीर
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