दयानिधान अबकी बार तो लीजे उबार
शरण पड़ा मैं तेरे द्वार भवसागर से पार उतार
तू ही मेरा प्यारा यार सबसे बड़ा तेरा दरबार
तेरा नाम मेरा आधार पतित तारना तेरा व्यवहार
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा , जम्मू कश्मीर
शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है सभी ग्रंथों का सार सभी एक है परिवार बना ले इसको जीवन का आ...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें