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शनिवार, 11 मार्च 2023

उल्टी रीति ऐ मन राता

 शीर्षक - उल्टी रीति मन राता 

उल्टी रीति ऐ मन राता , झूठ जूठन संग सदा ऐ लपटाता 

साधु संगति में कभी न जाता, इही कारन दुख अति पाता  

सतगुरु ही मन की रीति बदलाता, सुखनिधान से है मिलाता 

काया अंदर ही प्रभु दिखाता, मन ही मंदिर सदा सिखाता


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर 

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