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शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2023

प्यारे मना हरि रस पीने चलें

 शीर्षक - प्यारे मना हरि रस पीने चलें 

प्यारे मना हरि रस पी चल निरंतर 

इसमें असल खुमारी है 

प्यारे मना हरि रस पी चल निरंतर...............................

हरि नाम के नाम प्रताप से ही सब मैल गंवानी है 

हरि का नाम की अकथ कहानी किसी से कह नहीं पानी है 

प्यारे मना हरि रस पी चल निरंतर...............................

सब ओर माया का बोलबाला है

इस कारण ही अपने पराए का भाव आया है

प्यारे मना हरि रस पी चल निरंतर............................... 

ज्ञान का प्रकाश अंधकार मिटाता है

घट में ही सब कुछ नजर आता है

प्यारे मना हरि रस पी चल निरंतर...............................

सतगुरु की युक्ति ही मुक्ति दिलाती है

आवागमन का चक्र से छुटकारा दिलवाती है

प्यारे मना हरि रस पी चल निरंतर............................... 

सतगुरु का संग प्रभु कृपा से पाता है

आतंरिक तीर्थ में आठों पहर नहाता है

प्यारे मना हरि रस पी चल निरंतर............................... 

हरि का आनंद किसी से कह नहीं पाता है

स्वयं को जानकर अचंभित हो जाता है

प्यारे मना हरि रस पी चल निरंतर...............................

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा , जम्मू कश्मीर 

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