शीर्षक - कठिन है राह पर रुकना मत
कठिन है राह पर रुकना मत
मुश्किलों के आगे हौसला बुलंद कर
कांटों से भरे राह पर चलता जा
दुख दर्द को खुशी से सहकर हिम्मत बढ़ा
विघ्न बाधाओं को भी हरा जा
अपने साहस का परीक्षण कर
डर भय को पीछे छोड़ जा
कदम मंजिल की ओर बढ़ा बढ़ा कर चल
कोई भी बात कल पर मत रख
अपने ध्येय को जीवन का श्वास मानकर चल
कठिन भरे रास्तों पर घुटने टेकना मत
तूं चींटी दल की तरह हमेशा आगे बढ़ता चल
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें