शीर्षक - उलझनें सुलझाने तो मैं आया हूं
उलझनें सुलझाने तो मैं आया हूं
ईश्वर को मन अंतर में से पाने आया हूं
मन के भावों को भीतर से जानने आया हूं
आपा भाव खोकर स्वयं को पाने आया हूं
सर्वव्यापी परमेश्वर को हृदय में खोजने आया हूं
मान अपमान की भावना से ऊपर उठने आया हूं
आत्मा को परमात्मा से जोड़ने को आया हूं
विषय विकारों की दीवार को सतगुरु ज्ञान से तोड़ने आया हूं
प्रभु ही जीवन का परम ध्येय है मन को सिखाने आया हूं
सतगुरु ज्ञान ही मुक्ति मार्ग परम सत्य बतलाने आया हूं
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर
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