सतगुरु जी मैं नाम दीवाना बन गया
तेरे रंग में ऐसा रंग गया
दुनिया के सब रंग फीके लगने लगे
मोहमाया के बंधन स्वयं मन से हटने लगे
अपने पराए का भ्रमजाल नाश कर दिया
अंतर में ऐसा ज्ञान प्रकाश कर दिया
पांच विकार अब मोहि न सतावै
शब्द धुन में ध्यान लगावै
कर्मों का लेखा जोखा सतगुरु आप मिटावै
तन मन के दुख क्लेश मिटावै
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा , जम्मू कश्मीर
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