#सुख की छाया
सतगुरु तेरी मेहर सुख की बन गई छाया
अब नजदीक नहीं आएगी मेरे माया
मेरे ऊपर बन गई तेरी छत्र छाया
तन मन के सारे दुख दर्दों को मिटाया
मेरे मालिक तूने ऐसा कृपया का बादल बरसाया
सकल सुखों ने मेरे द्वार पर डेरा लगाया
तेरी रहमतों का प्रसाद तेरी कृपादृष्टि से पाया
हर श्वास रख मुझे अपनी शरणाया
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा , जम्मू कश्मीर
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