#शीर्षक - हीरे जैसा मानस जन्म
हीरे जैसा मानस जन्म कदर कर ले गंवार
अमूल्य श्वासो को क्यों करता हैं बर्बाद
कलयुग में केवल राम नाम है तत सार
बिना नाम के सब कर्म है बेकार
नाम सिमरन से खुलता दसवां द्वार
नाम धुन ही करती भवसागर से बेड़ा पार
बिना पूर्ण सतगुरु के कोई न पाता तार
बेमुख होकर सतगुरु से मानव जन्म होता ख़्वार
गुरु संगति में रहकर शुद्ध होता आचार
सतगुरु अनमोल वचन से जीवन में आता बहुत सुधार
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला
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