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बुधवार, 11 जनवरी 2023

मैं मेरी बहुत बड़ी बिमारी

 शीर्षक - मैं मेरी बहुत बड़ी बिमारी 

मैं मेरी बहुत बड़ी बिमारी, 

खा गई दुनिया सारी 

भूल गए सब रिश्तेदारी , 

मुसीबत बन‌ गई बहुत भारी 

सब रिश्ते बन गए लोकाचार,

 कोई नहीं करता एक दूसरे से प्यार

मस्तिष्क भी हो गया बीमार,

 तोड़ दिए रिश्तों के तार 

दिल से मिट गया प्यार, 

मैं मेरी में उलझ गया संसार 

मैं मेरी का मन‌ में उपज गया भाव ,

 धन दौलत ऐसा पड़ा बुरा प्रभाव


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर 



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