#शीर्षक - बड़े मेरे साहिबा
बड़े मेरे साहिबा ,तेरा अंत न पाया कोई
सब जग तेरा पसारा , सब में तूं बसे न्यारा
बड़े मेरे साहिबा............................
गुण अवगुण न विचारता, सबको संभालता
पापियों को भी तारता, सबके दिलों की जानता
बड़े मेरे साहिबा............................
दुख दर्द में बनता सहारा, ऐसा कृपालु दयालु स्वामी हमारा
मुश्किलों परेशानियों से बचाता, सारे संकटों से एक क्षण में उबारा
बड़े मेरे साहिबा............................
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा, जम्मू कश्मीर
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