शीर्षक- मेरे माधवे तुम जैसा दयाल ना कोई
मेरे माधवे तुम जैसा दयाल ना कोई
सकल मल हम तुम संग खोई
मेरे माधवे तुम जैसा दयाल ना कोई ...................
मन मेरा निंदा का भार उठाई
तेरी सोहबत में निंदा दे छड़ाई
मेरे माधवे तुम जैसा दयाल ना कोई ...................
पांच विकार के संग चित अति कठोर होई
पांच बैरी तुम संग निकट न आई
मेरे माधवे तुम जैसा दयाल ना कोई ...................
सबसे बड़ी तेरी अतुल्य बड़ाई
लोक परलोक के सब सुख तेरी शरणाई
मेरे माधवे तुम जैसा दयाल ना कोई ...................
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला: सांबा, जम्मू कश्मीर
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