#शीर्षक - शिक्षक ही भाग्यविधाता
शिक्षक तुम ही हो सबके भाग्य विधाता
तुम्हारी महिमा को सृष्टिकर्ता का कण कण गाता
ज्ञान विज्ञान तुम्हीं सिखाते
अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते
अपने शिष्य के सभी संशयों को एक क्षण में मिटाते
जीवन में प्रगति के नए नए राह दिखाते
शिक्षक प्रेम भाव से सबको पढ़ाते
ज्ञान के मोती सब ओर बरसाते
निष्काम भाव से अपना कर्तव्य निभाते
शिष्यों को सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिए हर एक तरीका अपनाते
शिक्षक की मेहनत का हमेशा करो सम्मान
हमें सफल बनाने के लिए भूल जाता करना विश्राम ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा , जम्मू कश्मीर
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