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रविवार, 31 अक्टूबर 2021

महंगाई की मार


#विषय  - महंगाई की मार

विधा - स्वैच्छिक 


बहुत बुरी है महंगाई की मार, 

जीना कर दिया सबका दुश्वार । 


   खाना पीने का सामान मिलता बहुत मंहगा, 

महंगाई ने कर दिया सबको नंगा । 


हर कोई रहता हर समय परेशान, 

कैसे लेकर आये घर खाने पीने का सामान। 


सब ओर इस महंगाई ने सबकी चिंताएँ बढ़ाई, 

इस महंगाई में बच्चे कैसे कर पायेगा पढ़ाई । 


पेट्रोल डीज़ल के दाम रोज दिन बढ़ते जाते, 

वाहन चालक की मुश्किलें और बढ़ाते। 


 दाल, सब्जी, सरसों तेल के दाम आसमान को छूते जाते, 

गरीब लोग अपने बच्चों को भूखे पेट सुलाते । 


महंगाई ने अब कर दी अपनी हद पार, 

अब तो जाग जायो सरकार । 


गरीब, मध्यम वर्गीय लोगों पर कर दो उपकार, 

अब नहीं झेली जाएगी हम से महंगाई की मार । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जिला -  सांबा , जम्मू कश्मीर







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