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गुरुवार, 21 अक्टूबर 2021

भगवती स्वरूपा : माता सीता जी

नमन मंच 🙏🙏🙏

गूंज क़लम की साहित्य संस्थान जम्मू कश्मीर इकाई

 दिनांक - 21/10/2021 

#विषय - भगवती स्वरूपा : माता सीता जी


धन्य धन्य जनक दुलारी, 

माँ सुनयना को प्राणों से प्यारी । 


राजा जनक की पुत्री बहुत ही प्यारी, 

महिमा गाते जग के नर नारी।  


शिवधनुष पर राम जी ने प्रत्यंचा चढ़ाई, 

तभी जनक सुता पत्नी रूप में पाई । 


अवध पुरी  वासियों ने खुशियाँ मनाई, 

जब माता सीता की डोली अयोध्या में आई । 


माता सीता ने ससुराल में सम्मान बहुत पाया, 

अपने पुनीत संस्कारों से सबको रिझाया  । 


चौदह वर्ष वनवास जीवन पति संग बिताया, 

पतिव्रता होने का कर्तव्य खूब निभाया । 


दुष्ट रावण ने माता सीता का कुटिलता से हरण किया, 

माता सीता को अपार कष्ट दिया। 


जनक दुलारी ने अपना सतीत्व हमेशा बचाया, 

दुष्ट रावण भगवती स्वरूपा जानकी के निकट नहीं आ पाया। 


भगवान राम ने दुष्ट रावण को काल के पास पहुंचाया, 

माता सीता को अशोक वाटिका से मुक्त कराया। 


माता सीता ने अग्नि परीक्षा द्वारा अपने सतीत्व का दिया प्रमाण, 

यह सब देख कर  सब हुए हैरान। 


अवधपुरी में प्रजा ने मां जानकी के चरित्र पर लांछन लगाया, 

माता सीता को पुनः वन में भिजवाया । 


माता सीता ने महर्षि वाल्मीकि  के आश्रम में आश्रय पाया, 

लव कुश को जन्म देकर रघुपति के वंश को आगे बढाया। 


माता सीता की कुरबानियों से भरी कहानी, 

सुनकर आंखों में भर आता है पानी। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा , जम्मू कश्मीर







      
















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