#विषय - हम सब है एक ईश्वर की संतान
विधा - कविता
हम सब है एक ईश्वर की संतान,
क्यों करते हैं मिथ्या अभिमान ।
ईश्वर ने सबको एक समान बनाया,
अपनी परम ज्योति को काया में ठहराया।
इंसान को सब योनियों से श्रेष्ठ बनाया,
इंसान को अपना निज स्वरूप बताया।
इंसान ने मोहमाया में चित लगाया,
ईश्वर के परोपकारों को भुलाया।
झूठ अभिमान में इंसानियत से मुंह मोड़ा,
ईश्वर से अपना नाता तोड़ा।
दया, क्षमा, मैत्री भाव को हृदय से निकाला,
अपना चित्त स्वार्थपन से भर डाला।
इंसान अपने अस्तित्व को पहचान,
तभी मिटेगा मन का मिथ्या गुमान।
हम सब है एक ईश्वर की संतान
सब में रहता वो विद्यमान ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा ,जम्मू कश्मीर
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