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शनिवार, 18 सितंबर 2021

कुर्सी की लड़ाई

  नमन मंच🙏🙏🙏

#क़लम की ताक़त साहित्यिक समूह, भारत

दिनांक  - 18/09/2021

 दिन - शनिवार

 #विषय - कुर्सी की लड़ाई

  विधा - छंदमुक्त कविता


सब नेताओं को कुर्सी प्यारी, 

नियत इनकी यही हर बारी । 


जनता को आपस में लड़वाते, 

हर बार ऐसे ही अपना वोट बनाते। 


कुर्सी की खातिर दीन ईमान भूल जाते, 

सबकी भावनाओं का सिर्फ  फायदा उठाते। 


कुर्सी ने ही इनको लड़वाया, 

एक दूसरे का दुश्मन बनाया । 


जनता के भले की न इनको परवाह, 

अपना घर भरने की दूसरे चोरों से लेते सलाह। 


कुर्सी की ताकत मिलते सब वादे भूल जाते, 

जनता का पैसा क्षण में चट कर जाते। 


गरीबों के नाम से योजनाएं बनाते, 

गरीब को एक पैसे का लाभ न पहुँचाते। 


कुर्सी की भूख नेताओं को इंसानियत से गिराती, 

गरीब को खून के आंसू रूलाती। 


कुर्सी की ताकत का जब होगा सही इस्तेमाल, 

तभी देश होगा पूरी तरह खुशहाल। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर ( केन्द्र शासित प्रदेश) 





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