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रविवार, 17 जनवरी 2021

जीवन बहती जलधारा है - कविता

   कविता - जीवन बहती जलधारा है

    जीवन बहती जलधारा है
    जिस में बहता जग सारा है
    इस धारा में बहते हुए अनेक संकट आते है
    जिनको दूर भागना है
   तभी तो हमको राह मिलेगी
  जीवन बहती जलधारा है
    जिस में बहता जग सारा है 
       जीवन की धरती में 
         जैसा बीजोगे वैसा ही फल पाओगे
            जीवन में धीरज को मित्र बनाने से
             आगे राह बनता जाता है
               जीवन बहती जलधारा है
    जिस में बहता जग सारा है।
जीवन के इस सफर में
अकेला सब अपने आप को पाते हैं
इस कर्मभूमि में कर्म का ही 
अच्छा- बुरा फल पाते हैं
जीवन बहती जलधारा है
    जिस में बहता जग सारा है।
जीवन की इस धारा को आगे बढ़ाने के लिए
अनेक बाधाओं को दूर भागना पड़ता है
जीवन भी अनेक रंग दिखाता है
जीवन बहती जलधारा है
    जिस में बहता जग सारा है।
                                    अमरजीत सिंह  
                                    जम्मू-कश्मीर, जम्मू

https://dhangurunanak1313.blogspot.com/2021/01/blog-post_17.html






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