कविता
हिंसा राह नहीं है अपने हक लेने का
हिंसा राह नहीं है अपने हक लेने का
यह अपनों को ही नुकसान पहुंचती
हक लेने के लिए लड़ना पड़ता है
शांति का पाठ पढ़ना पड़ता है
हिंसा राह नहीं है अपने हक लेने का।
राष्ट्र ध्वज का सम्मान करो
बार बार सलाम करो
जब बन आये इसकी आन शान पर
इसके लिए जान कुर्बान करो
देश को प्रगति की ओर ले जाना है
अपना कर्तव्य निभाना है
हिंसा राह नहीं है अपने हक लेने का
संविधान की गरिमा बनाए रखें
दिल में देशभक्ति जगाएं रखें
हम हैं अहिंसा के पुजारी
हिंसा नहीं है हमें प्यारी
हिंसा राह नहीं है अपने हक लेने का।
राष्ट्र विरोधी ताकतों से बचना हमारा काम है
राष्ट्र सेवा ही हमारा काम है
हम सब एक हैं यही हमारा नारा है
भारत देश हमें प्राणों से भी प्यारा है
हिंसा राह नहीं है अपने हक लेने का।
अमरजीत सिंह
जम्मू-कश्मीर, जम्मू
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