कविता - प्रभु सिमरन की वेला
मानस जन्म प्रभु सिमरन की वेला
इस जग में सब कोई अकेला
सिमरन बिना नहीं कोई उतरा पार
मन इस तथ्य को सोच विचार
प्रभु सिमरन में मिले कोटि आनंद
हृदय प्रगट भए परमानंद
मानस जन्म का यही लाभ
प्रभु सिमरन से होय उदार
सिमरन की कीमत किसी विरले जानी
जिन अनुभव किया हो प्रभु ध्यानी
मानव जन्म में ही सिमरिया जाया
रे मन तूं अवसर क्यों गंवाए
सिमरन से हो तूं अंतर्मुखी
तृष्णा अग्न मन की बुझी
प्रभु प्रेम की यही निशानी
मैं मेरी की मिट्टी गुमानी
प्रेम भक्ति का यही सार
सब में दिखे दीन दयाल
प्रभु दर्शन से जन्म मरण मिट जाए
सब सुख हरि चरनन में पाएं।
अमरजीत सिंह
जम्मू कश्मीर, जम्मू
https://dhangurunanak1313.blogspot.com
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