कविता - बनना है तो इंसान बनो
बनना है तो इंसान बनो
जीवन में अच्छा काम करो
अवगुणों को हमेशा भगाएं रखो
गुणों को हमेशा जगाएं रखो
इंसान तो सभी कहलाते हैं
इंसानियत किसी विरले में होती है
दया को बनाओं गहना
सीखों सब से मिलकर रहना
दिल में रखो सभी करूणा
हर परिस्थिति से है लड़ना
जीवन में कर्म ही प्रधान रहा है
कर्म ही जी ज़हान रहा है
जाति कुल से कोई महान नहीं बनता है
सदा कर्म ही जाति को महान बनाता है
प्रेम पुरुष की तूं ही संतान है
क्यों बन गया शैतान है
अपना अस्तित्व भूल गया
अज्ञान की अग्नि में जल गया
जिसने अपना अस्तित्व जान लिया
मानव जीवन का आनंद मान लिया।
अमरजीत सिंह
जम्मू कश्मीर, जम्मू
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