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गुरुवार, 28 जनवरी 2021

प्रभु चरनन की प्रीत

  कविता - प्रभु चरनन की प्रीत

मीठी मीठी रे प्रभु चरनन की प्रीत
तिस पर वार दूं तीन लोक का राज
प्रभु के चरण दीन का आसरा
मन से मिट गया भ्रम का जाला
जब से भए दयाल प्रभु 
मोहे न मोही माया
दीन की प्रतिपाल करें 
सब दुष्टों का संहार करो
प्रभु के चरण कमलों करो नमस्कार
मिट जाएंगे सब रोग तुहार
तेरे चरणों में बैकुंठ धाम
तेरे ऊपर जाऊं कुर्बान
जो मांगा छिन में पाया
तेरी शरण में सकल सुख पाया 
देव देवी सब तुझे धयावै
तब ही जग में पूजे जावै
तेरे चरणों की महिमा अपरम्पार
तूं ही प्रभु सच्चा निरंकार
कलयुग में तेरा नाम तारणहार
सब ओर दिखता प्रभु निरंकार
प्रभु मोहे किछ कृपा कीजै
अपने चरनन की प्रीत लगीजै।

अमरजीत सिंह
जम्मू-कश्मीर, जम्मू

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