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मंगलवार, 19 जनवरी 2021

समय का मोल - कविता

  # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार दिल्ली इकाई

# दिनांक - 14/05/2021

# दिन - शुक्रवार

# विषय- समय

# विधा - स्वैच्छिक

   

काम करके कमर जब टूटी 
लगती है किस्मत फूटी 
थोड़ी मिलती है मज़दूरी 
खाने को नहीं मिलती घी चूरी 
तब समझ आता है समय का मोल। 
घर का खर्च चल नहीं पाता
मनपसंद खाना खा नहीं पाता
दुखों को भोगने के लिए होता मजबूर 
तब समझ आता है समय का मोल।
बच्चा स्कूल जा नहीं पाता 
किताबों के बिना पढ़ नहीं पाता 
दुख की बनती है घनी छाया
तब समझ आता है समय का मोल।
पढ़ने के समय पढ़ा नहीं 
गुरु के अमूल्य ज्ञान को समझा नहीं
दुख ही दुख दिखता चारों ओर
तब समझ आता है समय का मोल।

अमरजीत सिंह
जम्मू-कश्मीर,जम्मू
 

3 टिप्‍पणियां:

विकास नैनवाल 'अंजान' ने कहा…

सही कहा....समय का मोल अक्सर समय गुजरने के बाद ही समझ आ पाता है...

अमरजीत सिंह ने कहा…

धन्यवाद आप सब का

अमरजीत सिंह ने कहा…

धन्यवाद

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