नमन मंच 🙏🙏🙏
#हिंददेश परिवार फरुखाबाद इकाई
दिनांक - 08/07/2021
दिन- गुरुवार
#विषय - विनम्रता की भावना
विधा - गद्य - पद्य (आलेख)
शीर्षक - विनम्रता हमारी पहचान है
"झुकता तो वहीं है जिसमें जान होती है,
अकड़ना तो मुर्दों की पहचान होती है।"
विनम्रता सबसे बड़ा गुण है जिस मनुष्य में यह गुण है वे बहुत भाग्यशाली हैं। विनम्र व्यक्ति का सभी सम्मान करते हैं क्योंकि वे धन और किसी विशेष गुण का अहंकार नहीं रखता है।
रहीम जी कहते है-
"छिमा बडेन को चाहिए,छोटन को उत्पात।
का रहिमन हरि को घट्यो,जो भृगु मारी लात।"
इस दोहे में रहीम जी कहते हैं कि अगर कोई अभद्र व्यक्ति अभद्रता से बात करें तो भद्र पुरुष को उस व्यक्ति को क्षमा कर देना चाहिए और विनम्रता से उसके साथ बात करनी चाहिए। आगे रहीम जी कहते हैं कि कोई बात नहीं अगर ॠषि भृगु ने भगवान विष्णु को लात मार दी क्या इससे उनका कुछ घट गया। उल्टा ॠषि भृगु उनकी विनम्रता देखकर नमस्तक हुए । हमारे धार्मिक ग्रंथों में विनम्रता को श्रेष्ठ और उत्तम गुण माना गया है ।
विनम्र और अहंकारी व्यक्ति को समझने के लिए यह उदाहरण कारगर साबित होगा। अंहकारी व्यक्ति उस खाली बर्तन की तरह है जिसमें कुछ कंकर भर दिए जाए तो थोड़ा सा हिलने पर भी आवाज करता है। विनम्र व्यक्ति उस भरें हुए बर्तन की तरह है जो अपने गुणों को अपने अंदर समेट कर रखता है और उसका दिखावा नहीं करता है।जब तूफान आता है जो पेड़ सीधे खड़े रहते हैं हवा उनको जड़ों से उखाड़ कर फेंक देती है ,जो पेड़ झुक जाते हैं वे उखड़ने और टूटने से अपने आप को बचा लेते हैं। विनम्रता कमजोरी की निशानी नहीं है यह निशानी है व्यक्ति के परिपूर्ण होने की।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू-कश्मीर, जम्मू
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