सबसे पहले हमें यह ज्ञात होना चाहिए कि इन्सान कौन है, उसके अंदर कौन से गुण होने चाहिए। प्रथम जिस मनुष्य के हृदय में दया की भावना विद्यमान है वहीं इन्सान कहलाने का अधिकारी है।जब हम किसी दुःख देखकर दुखी हो, किसी का सुख देखकर सुखी हो। इससे हमें यह ज्ञात होगा कि हम इंसानियत सीख रहे है।जब हमारी दया धर्म,जाति, देश से ऊपर उठ जाती हैं तब हम इंसानियत के गौरव प्राप्त कर लेते है।
दया धर्म का मूल है
3 टिप्पणियां:
अति सुदंर
बहुत सुंदर विचार है
धन्यवाद जी
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