# विषय - धरती माता की गोद में
# विधा - स्वैच्छिक
धरती मां की गोद में ,
मिलते सुख अनंत,
कण-कण में ममता भरी ,
हरे हरे वृक्षो की हवा ,
लगती मां के कोमल हाथों जैसी ,
तेरी गोद में कोई भेद भाव नहीं,
जाति, रंग, धर्म का,
तेरे पर्वतों की छाया में,
दुलार मां के प्रेम जैसा,
नदियों की निर्मल धारा ,
अमृत रस है सारा ,
खेत खलिहानों में ,
दिखता तेरा अन्नपूर्णा रूप,
धरती मां तेरी गोद में ,
मिलते सुख अनंत।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू, जम्मू कश्मीर
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