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मंगलवार, 12 जनवरी 2021

धरती मां की गोद में - कविता


# विषय - धरती माता की गोद में

# विधा - स्वैच्छिक


             

धरती मां की गोद में , 

मिलते सुख अनंत, 

कण-कण में ममता भरी , 

हरे हरे वृक्षो की हवा , 

लगती मां के कोमल हाथों जैसी , 

तेरी गोद में कोई भेद भाव नहीं, 

जाति, रंग, धर्म का, 

तेरे पर्वतों की छाया में, 

दुलार मां के प्रेम जैसा, 

नदियों की निर्मल धारा , 

अमृत रस है सारा , 

खेत खलिहानों में , 

दिखता तेरा अन्नपूर्णा रूप, 

धरती मां तेरी गोद में , 

मिलते सुख अनंत।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर









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