मेरी मुलाकात जिन्दगी से, एक दिन हो गई
अपना सुख दुख बांट कर, वो जी भर रो गई ।
क्या खोया क्या पाया ,यही बताने में भी कहीं खो गई
वो भी अपना दुखड़ा, मेरे सामने रो गई
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा,जम्मू-कश्मीर
शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है सभी ग्रंथों का सार सभी एक है परिवार बना ले इसको जीवन का आ...
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