विषय गलियाँ
तेरी गलियाँ में आकर सुकून बहुत पाता हूँ ,
दुनियादारी के सब झंझट भूल जाता हूँ ।
तेरी याद में ही सब सुखों का आनंद उठाता हूँ ,
अपने आप को तेरा- तेरा कहता ,तेरा ही बन जाता हूँ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा,जम्मू-कश्मीर
शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है सभी ग्रंथों का सार सभी एक है परिवार बना ले इसको जीवन का आ...
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