#गुरू गोबिंद सिंह जी
अमृत भरी नजरों से निहाल करो जी
भवजल में डूबती बेडी पार जी
मैं भाई सैदा जैसा भाग्यवान न हूँ
तुम ही अपनी रहमतों की बौछार करो जी
दर पर आए की फरियाद कबूल करो जी
बाजा वाले सतगुर आवागमन से खलास करो जी
मेरे रोम रोम में नाम का प्रकाश करो जी
ढोंगों में फंसे मन का भ्रम नाश करो जी
मानवता की सेवा का भाव भरो जी
भेदभाव की सोच में बदलाव करो जी
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा , जम्मू-कश्मीर
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