#शीर्षक - पैसा ही रिश्ते की कीमत तय करता
आज का जमाना पैसा पैसा करता
पैसा से ही रिश्ते की कीमत तय करता
दुख दर्द किसी अपने का हमें अब नहीं रुलाता
सुख स्नेह का लेप अब कोई नहीं लगाता
अपने ही अपनों से मुंह छिपाते
मदद करने से बहुत घबराते
गरीब से करीबी रिश्तेदारी होने पर भी कोई नहीं बतलाता
अमीर से दस पीढ़ियों पुरानी रिश्तेदारी जोड़ने में लग जाता
अब जमाने का बन गया नया दस्तूर
धन दौलत पर दुनिया के लोग करते हैं बहुत गरूर
समय बदलता रहता है जब प्राण पखेरू उड़ जाते हैं दूर
तब मान गरूर हो जाता हमेशा के लिए चूर चूर
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा, जम्मू-कश्मीर
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